A:
(1) हमारे विचार से नया संसार और नया इंसान बनाने की बेहद जरूरत है क्योकि आज के समय में लोग इसानियत और भाईचारा भूल चुके है इसे फिर से शुरू करने के लिए लोगो के व्यवहार में परिवर्तन के लिए उनके अंदर नई उमंग अथार्त नए संसार के निर्माण की आवश्यकता है I
(2) रोज –रोज त्यौहार मनाने से कवि का तात्पर्य यह है कि वह संसार में चारो और खुशयाली और त्योहार जेसा माहोल देखना चाहता है यदि ऐसा है तो रोज-रोज त्योहार मनाना उचित है I
(3) ऊपर लिखी बाते पूर्णतया सच हो सकती है यदि हम समाज में भाईचारा और प्रेम का माहोल बना दे इसके लिए करना कुछ नही है सिर्फ अपने अंदर के अहंकार को मारना है और लोगो के सुख – दुःख को आपस में मिलकर बाटना है I
(4) कवि हम धरती के लाल इसलिए कहना चाहते है क्योकि बच्चे जो मन में ठान ले उसे करके ही मानते है यदि बच्चो के प्रण से ऐसा हो हो जाए तो संसार स्वर्ग बन जाए I