हरिवंश राय बच्चन की अग्निपथ कविता का प्रतिपाद्य | Harivansh Rai Bachchan Ki Agneepath Kavita Ka Pratipadya

हरिवंश राय बच्चन हिंदी साहित्य की उत्तर-छायावादी कविता की व्यक्तिवादी काव्यधारा के आलोक स्तंभ हैं। मानव भावना, अनुभूति, प्राणों की ज्वाला तथा जीवन संघर्ष के आत्मनिष्ठ कवि ने अपने काव्य द्वारा हिंदी साहित्य का ही नहीं अपितु विश्व साहित्य का भी सौंदर्यवर्धन किया है। जीवन की मधुरता और कटुता का सम्मान करने वाले बच्चन ने […]Read More

कबीर संत काव्य की प्रमुख प्रवृत्तियाँ | Kabir Sant Kavya Ki Pramukh Pravrttiyaan

हिंदी साहित्य के इतिहास में मध्यकाल के पूर्व भाग को भक्तिकाल की संज्ञा दी गई हैं। आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने इसकी समय सीमा संवत् 1375 – संवत् 1700 तक स्वीकार की है। भक्तिकाल हिंदी साहित्य का “स्वर्णयुग ” है। भक्तिकाल की दो प्रमुख काव्यधाराएँ हैं – निर्गुण काव्यधारा सगुण काव्यधारा निर्गुण के अंतर्गत ज्ञानाश्रयी और […]Read More