Question 1

लेखक ने शिरीष को कालजयी अवधूत ( संन्यासी ) की तरह क्यों माना है?

Answer

आचर्य हजारी प्रसाद दिर्वेदी शिरीष को अदभूत मानते थे क्योकि सन्यासी की भाति वह भी सुख दुःख की चिता नहीं थी शिरीष कलयाज़ी अबधूत की भाति जीवन अजये मत्र का प्रचार होता था तब भी वह कोमल फूलो से लदा लहलहाता था I बाहरी गरमी , धूप , वर्षा आधी लू उससे प्रभावित नहीं थे I

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